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जब आप किसी भी सार्वजनिक स्थल से गुजरते है चाहे वो रेलवे स्टेशन हो या मंदिर हो या फिर मस्जिद हो, आपने देखा होगा आपको हर धर्म से कोई न कोई भीख मांगता मिल जाएगा, चाहे इसाई हो चाहे मुस्लिम हो या हिन्दू हो लेकिन कोई भी पगड़ी पहना व्यक्ति आपको भीख माँगता नहीं मिल सकता इस बात की गारंटी भारत में रहने वाला कोई भी व्यक्ति ले सकता है क्योंकि उसने कभी ऐसा कुछ देखा ही नहीं लेकिन आपने सोचा है कभी ऐसा क्यों? कोई सिख भी तो गरीब हो सकता है, जरुरी तो नहीं हर कोई चांदी की चम्मच मुंह में लेकर पैदा होता है

तो फिर ऐसा क्यों? क्या इसके पीछे कोई बंधन है या कोई रिवाज? तो आज हम उसीके बारे में आपको बतायेंगे इससे आपके दिल में सिख भाइयो के लिए इज्जत और भी ज्यादा बढ़ जायेगी और आप भी एक बार के लिए बोल ही पड़ेंगे, सिंग इज किंग है भाई

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गौरवशाली/ वीरतापूर्व इतिहास – सिखों का इतिहास बहुत ही गौरव भरा रहा है, पिछले समय में सिखों में गुरु तेग बहादुर गुरु गोविन्द सिंह से लेकर भगत सिंह तक खूब बड़े बड़े महान योद्धा हुए है जिन्हें सिख आज भी बहुत मानते है इनके प्रति आदर का भाव सिखों को ऐसा करने की इजाजत नहीं देता क्योंकि इन महापुरुषों ने सिर्फ देना सिखाया है

लालन पालन– सिखों का लालन पालन भी इसी तरह से होती है कि उनमे स्वाभिमान कूट कूट कर भर दिया जाता है, सिखों को सिखाया जाता है बने तो अपने पूर्वजो जैसा ही बनना इन सबमे पलते बड़े होते सिख इस तरह से ढल जाते है कि वो चाहे मजदूर बन जायेंगे लेकिन कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलायेंगे

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समाज– सिख समाज में चारो तरफ अपने पूर्वजो की गाथाओं का गुणगान है वहां पर सिर्फ देने की बाते होती है, हर कोई दानवीर बनकर घूमता है ऐसे में रह रह कर इंसान की मानसिकता ऐसी हो जाती है कि वो स्वाभिमानी हो जाता है इसलिए आपको कही भी सिख कोई चीजे बेचकर गुजारा करते हुए जरुर दिख सकता है लेकिन भीख मांगते हुए कभी नहीं

 

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